सोहराय_परब
# सोहराय_परब सारना धर्मावलंबी किसी भगवान की भी पुजा नही करते है । *सारना धर्म का एक नाम सत्य धर्म भी है ।ये लोग किसी भी ऐसे काल्पनिक भगवान को नही मानते है जिसके अस्तित्व का कोई प्रमाण न हो ।ये लोग केवल सत्य की पुजा (पुजा भी सही शब्द नही है ।पुजा काल्पनिक देवी देवता की होती है सारना धर्मावलंबी अराधना करते है )करते है जिसका अस्तित्व कभी था या है । *सारना धर्म भारत का सर्व प्राचीन धर्म है ।जब सारना धर्म अपनी चरमोत्कर्ष पर थी उस युग को सत्य(सारना ) युग कहा जाता है ।आर्य के आगमन से त्रेतायुग का प्रारंभ माना जाता है । सारना धर्मावलंबी किसी भी काल्पनिक देवी देवता मे विश्वास नही करते है ।वे अपने अराध्य को भूत कहते है ।भूत अर्थात पास्ट ।कहने का मतलब है कि सारना धर्मावलंबी अपने पुर्वज की अराधना(पुजा नही ) करते है ।हर आगन मे भुतपिडहा होता है ।वो हमारे पुर्वज की बेदी होती है इसलिए उसे भुतपिडहा (भूत =पास्ट, पीडहा=बैठने का जगह रहने का जगह )कहा जाता है । *हम हर वर्ष रोहिन के अवसर पर उन खेतो की मिट्टी लाकर भुतपिडहा मे तथा अपने घर के चारो ओर डालते है जिन खेतो की मिट्टी मे हमारे पुर्वज की खुन प...