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Showing posts from April, 2016

पृथ्वी दिवस पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ !!

पृथ्वी दिवस पर बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ !! झारखंड राज्य के पावन भूमि पर पैदा हुये हम झारखंडी मुलवासी सदियों से ही प्रकृति के साथ गहरा संबंध रहा है , यहाँ की जलवायु, पहाड़-पर...

स्थानीय निति /डोमिसाइल - झारखण्ड

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स्थानीय निति /डोमिसाइल - झारखण्ड निर्माण के बाद झारखण्डीयों को एक चिर प्रतिपक्ष आकांक्षाओं का वर्षों से बाट जोह रहे अपनी पहचान को पुनः स्थापित करने का सपना साकार होता सा अनुभव होने लगा था।  झारखण्ड निर्माण के साथ ही यह सिद्ध होना था कि झारखण्ड मात्र एक राज्य के रूप में बन तो गया किन्तु झारखण्ड को पूर्ण रूप से झारखण्डी को  सौंपने की तैयारी, मंशा, ईच्छा शक्ति या नीयत भाजपा - कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और आजसू सरकार में नहीं थी इस अवधारणा के पीछे औधोगिक हित, प्रशासनिक अवसर वादिता और राजनीतिक लुट प्रेरक तत्व साक्रिय थे ये लोग झारखण्ड को एक चारागाह के रूप में रचने बसाने की प्रक्रिया में सतत क्रियाशील है झारखण्डीयों की अस्मिता सुरक्षित की जाए जिस तरह अन्य प्रदेशों में डोमिसाइल नीति है। उसी संवैधानिक हक को लागू करने के लिए उस नीति का जिस प्रकार का विरोध किया गया वह सिद्ध करता है कि झारखण्ड पर कब्जा बना कर बैठे बाहरी लोग झारखण्ड को इतनी आसानी से झारखंडिओ को नहीं सौपेंगे डोमिसाइल नीति वस्तुतः प्रत्येक राज्य में लागू है और इसका कारण यह है कि आजादी के पश्चात ...

स्थानीय नीति के अनुत्तरित प्रश्न :

स्थानीय नीति के अनुत्तरित प्रश्न : १)दूसरे किस राज्य में स्थानियता ऐसी है? २)यहाँ कौन स्थानीय नहीं हैं? १९८६ ही क्यूँ? ३)संविधान में स्पष्ट उल्लेख है एक नागरिक सिर्फ़ एक जगह क...

आजसू ने भी स्थानीय की पहचान के लिए खतियान को ही आधार बनाने की मांग की है़

रांची: सरकार की सहयोगी पार्टी आजसू ने भी स्थानीय की पहचान के लिए खतियान को ही आधार बनाने की मांग की है़ आजसू का कहना है कि राज्य और जिलास्तरीय नौकरियाें में शत-प्रतिशत नियुक...

PM मोदी के आगमन पर 24 को झारखंड बंद का एलान

NEWS UPDATE : PM मोदी के आगमन पर 24 को झारखंड बंद का एलान, मनेगा काला दिवस : स्थानीय नीति लागू नहीं करने के विरोध में आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच ने आगामी 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र ...

पिछले 65 सालों से केन्द्र और राज्य सरकार कुड़मी समुदाय को सिर्फ और सिर्फ छलने का काम कर रही है। आदिवासी_कुड़मी_समाज

हम लेके रहेंगे - अपना हक हम लड़के लेंगे - अपना हक हमें देना होगा - हमारा हक हम छीन के लेंगे - अपना हक हम लेके रहेंगे - अपना हक #आदिवासी_कुड़मी_समाज पिछले 65 सालों से केन्द्र और राज्य स...

मैं आदिवासी।

मैं आदिवासी मैं जंगलों में रहता, पहाड़ों मैं रहता। मैं मैदानों, नदी घाटियों मै रहता।शहरों मै भी अब आशियाने मेरे। मैं आदिवासी। न मै गिरीजन, न मै वनवासी। न ही मैं अनुसूचित जन...

देश के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलनकारी चुआड़/चुहाड़ (कुड़मी) विद्रोह

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दिनांक 05 अप्रैल 2016 को सुवर्णरेखा निर्मल गेस्ट हाउस, जमशेदपुर में झारखंड मूलवासी अधिकार मंच की ओर से देश के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलनकारी चुआड़/चुहाड़ (कुड़मी) विद्रोह के महानायक क्रांतिवीर शहीद रघुनाथ महतो के 238वीं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद श्री विद्युत वरण महतो जी ने कहा, "जब 1765 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सर्वप्रथम तत्कालीन बंगाल के छोटानागपुर के जंगलमहल जिला में मालगुजारी वसूलना शुरू किया गया, तब अंग्रेजों के इस षडयंत्रकारी तरीके से जल जंगल जमीन हड़पने की गतिविधियों का सन् 1769 ई. में कुड़मी आदिवासियों द्वारा रघुनाथ महतो के नेतृत्व में सबसे पहला विरोध किया गया और ब्रिटिश शाशकों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका गया। जब अंग्रेजों ने पूछा, ये लोग कौन हैं, तो उनके पिट्ठू जमींदारों ने घृणा और अवमानना की दृष्टि से उन्हें चुआड़ (बंगाली में एक गाली) कहकर संबोधित किया, तत्पश्चात उस विद्रोह का नाम 'कुड़मी विद्रोह' के स्थान पर 'चुआड़ विद्रोह' पड़ा। उन्होंने आगे कहा, कि इतिहासकारों ने शहीद रघुनाथ महतो के साथ न्याय...