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Showing posts from February, 2017

आइज मानगर बिनोद बिहारी माहतअ कर मेंझला बेटा √ डा० निलकमल माहतअ कर मरल दस दिनेक कामान किरिआ कर करता मरताहारेक, बड़अ जामाइ डा० सुजित कुमार साँखुआरे करता हिसाबें दाइभार सिराउएक किरिआ करला ।

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जोहार🙏🏿 🌳सारनाथान🌲 आइज मानगर बिनोद बिहारी माहतअ कर मेंझला बेटा √ डा० निलकमल माहतअ कर मरल दस दिनेक कामान किरिआ कर करता मरताहारेक, बड़अ जामाइ डा० सुजित कुमार साँखुआरे करता हिसाबें दाइभार सिराउएक किरिआ करला । आर इ किरिआ कर पिढ़ि नइआ मानगर, अनिल पुनरिआरे करला। जगाने संजय काड़ुआर, जयकिशोर काड़ुआर, सुधिर काड़ुआर, नंदकिशोर काड़ुआर, मोहन साँखुआर, आरअ निलकमल बाबुक समधि कुड़मि पेहला आ०पी०एस० मानगर सालिग्राम माहतअ साँखुआरें जगान देलथिन     जोहार🙏🏿 सुसारे; आदिबासि कुड़मि समाज भाखिचारि आखड़ा सारिअन समाज

टोटमिक कुड़मि समाज, चन्द्रपुरा प्रखंड़ का वन भोज सह मिलन समारोह। दिनांक 26/02/2017 दिन रविवार। स्थान वेल्फेयर सेंटर चन्द्रपुरा।

टोटमिक कुड़मि समाज, चन्द्रपुरा प्रखंड़ का वन भोज सह मिलन समारोह। दिनांक 26/02/2017 दिन रविवार। स्थान वेल्फेयर सेंटर चन्द्रपुरा।

वर्तमान समय में लोगों के अंदर चल रहे विभिन्न प्रकार की मनोदशा जो सामाजिक-राजनीतिक के विभिन्न मुद्दों पर उपज रहा है !

वर्तमान समय में लोगों के अंदर चल रहे विभिन्न प्रकार की मनोदशा जो सामाजिक-राजनीतिक के विभिन्न मुद्दों पर उपज रहा है ! कुछ लोग हैं जो अपने समाज की आन-बान के लिए प्रयासरत हैं तो ...

सारना धर्मावलंबी किसी भगवान की भी पुजा नही करते है ।

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सारना धर्मावलंबी किसी भगवान की भी पुजा नही करते है । *सारना धर्म का एक नाम सत्य धर्म भी है ।ये लोग किसी भी ऐसे काल्पनिक भगवान को नही मानते है जिसके अस्तित्व का कोई प्रमाण न हो ।ये लोग केवल सत्य की पुजा (पुजा भी सही शब्द नही है ।पुजा काल्पनिक देवी देवता की होती है सारना धर्मावलंबी अराधना करते है )करते है जिसका अस्तित्व कभी था या है । *सारना धर्म भारत का सर्व प्राचीन धर्म है ।जब सारना धर्म अपनी चरमोत्कर्ष पर थी उस युग को सत्य(सारना ) युग कहा जाता है ।आर्य के आगमन से त्रेतायुग का प्रारंभ माना जाता है । *सारना धर्मावलंबी किसी भी काल्पनिक देवी देवता मे विश्वास नही करते है ।वे अपने अराध्य को भूत कहते है ।भूत अर्थात पास्ट ।कहने का मतलब है कि सारना धर्मावलंबी अपने पुर्वज की अराधना(पुजा नही ) करते है ।हर आगन मे भुतपिडहा होता है ।वो हमारे पुर्वज की बेदी होती है इसलिए उसे भुतपिडहा (भूत =पास्ट, पीडहा=बैठने का जगह रहने का जगह )कहा जाता है । *हम हर वर्ष रोहिन के अवसर पर उन खेतो की मिट्टी लाकर भुतपिडहा मे तथा अपने घर के चारो ओर डालते है जिन खेतो की मिट्टी मे हमारे पुर्वज की खुन पसीना गिरा हो ।...

जनजाति कुड़मियों की विवाह के प्रकार

जनजाति कुड़मियों की विवाह के प्रकार --------------------------------------- 1. माड़ुआबिहा 2. गलट बिहा 3. सांघा बिहा 4. कइरा बिहा 5. बेंदकड़ि बिहा 6. दू-चुल्हा जरी बिहा 7. घरजंउअइआ बिहा 8. राजी खुसी बिहा 9. प्रेम बिहा 10. भेग...

पथि पुजाक नेहर सेंउरन

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* पथि पुजाक नेहर सेंउरन     " हे हामर गिआनेक उतसअ आधार सिलेट-पथि-खाता-कलम आर हामर सिखाअइआ गुरुजन, गेला एकबछर धरि जे गिआन टा तहराक दरुने सँगराउए पारलँ, सेइ गिआन टा जेइसें मन-मगजें राखे पारिअ आर जिबनेक भालअ कामे लागाउए आर सञतिए पारिअ। आउति समञे हामर गेधिञ नाउआ आर मिरा गिआन सँगरइ आर एहे जगतेक हड़ आर जिबकुल कर रइकखा हेउए पारइ। तहराक दरुनें पाउअल गिआन जेइसे हामर गेधिञ भिंजइ-सिझइ आर आपन धँचरेक काम-पाइटें जेइसे हेला भुला निहि हेउअइ। हे माहामाञ-पथिमाञ, अरिआ परिआक माने गुमाने सार सगुने आज मधुमासेक ञिंजतिआ चांदेक 5 दिने, हबारें, हामर सार सेंउरनेक आड़ापाटाञ सुंदर आर सइसटब भाभें तहराके सरधा सममान करेक तेहें हामर कमजउर मने सकति जागाउआ। हामर डाकें साड़ा-सबदअ देइके आपन ठाञ धरिहा। तहराके हिआखालासें कटि कटि जड़हात करि जहार जानाइहन। 🙏🏿🙏🏿🙏🏿 *(एहे नेहर टा तिन धाउ कहि कहि तिनअ धाउ आरुआ-चार, आठ-कलाइ, आर बेलपात पथिगिलाके देइके हाठुगाड़ि जहार करबेहे)*🙏🏿🙏🏿🙏🏿