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Jharkhand Election 2024

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एक दशक पहले के चुनावी नतीजों को देखेंगे तो राष्ट्रीय दलों को 5 -7 हजार के अंतर में वोट प्राप्त होता था ।  इधर कुछ चुनाव के नतीजों को देखेंगे तो जीतने वाले को सर्वाधिक वोट मिलता है । उसके करीब हारने वाले को मिलता है । फिर तीसरे स्थान प्राप्त करने वाले राष्ट्रीय दल से अंतिम इंडिपेंडेंस उम्मीदवार तक को 10हजार से कुछ सौ वोट मिलता है ।                Jharkhand Election 2024 तो सवाल है -  1.चुनाव परिणाम में पार्टी समर्थक के वोट कहां चले जाते हैं?  2. क्या विभिन्न पार्टियों के चुनावी सभा की भीड़ नकली होती है ? 3. क्या पार्टी के समर्थक पार्टी से दगाबाजी कर अपना वोट कहीं और डाल देते हैं?  4. जब समर्थित पार्टी को वोट ही नहीं देना होता है तो पार्टी पार्टी के नाम पर लोग आपस में क्यों लड़ते रहते हैं ? 5. जब हारने जीतने वाले दल में ही 90% वोट जा रहा है तो सैकड़ों पार्टी की आवश्यकता क्या है ?  6. क्या देश में दो पार्टी सिस्टम लाने के लिए मैदान तैयार किया जा रहा है ?                ...

कुड़मी समाज मे तलाक ( छाड़बेड़ ) :-

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कुड़मी समाज मे तलाक ( छाड़बेड़ ) :- स्त्री की और से तलाक (छाड़बेड़):- स्त्री को अगर उसके पुरुष से नहीं बनती हैं। दोनों के बीच अनबन की अति हों जाने पर स्त्री और पुरुष दोनों के ससुराल वालों को बुलाकर ग्रामसभा के सामने स्त्री महुआ के पत्ते चिरती है। इस तरह से छाड़बेड़(तलाक)की सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जाती थी। लड़की महुआ के पेड़ को साक्षी मानकर बिहा करती हैं। पुरुष की और से तलाक ( छाड़बेड़):-  पुरुष और स्त्री के बीच अनबन की अति हों जाने पर स्त्री और पुरुष दोनों के ससुराल वालों को बुलाकर ग्रामसभा के सामने पुरुष आम के पत्ते चिरता है। इस तरह से तलाक की सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जाती थी। लड़का आम के पेड़ को साक्षी मानकर बिहा करता है। हरिपद काड़ुआर  स्रोत:- जनजाति परिचिति (तुलनात्मक अध्ययन) *लक्ष्मीकांत मुतरुआर*

Black Day for Manbhum

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⚫️ Black Day for Manbhum ⚫️ 1948 में मानभूम डिस्ट्रिक्ट कमिटी कांग्रेस पार्टी द्वारा बांग्ला भाषा को मानभूम का भाषा बनाने का प्रस्ताव लाती है, प्रस्ताव 43/54 वोट से ख़ारिज होजाता है, मात्र 11 लोगों ने सहमति जताई थी 55 में कमिटी के प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी ने इसके बाद इस्तीफा देकर अतुल चंद्र घोष के नेतृत्व में लोक सेवक संघ बनाया और बांग्ला भाषा को आधिकारिक भाषा बनाने में लग गए, इसके लिए census रिपोर्ट के डाटा के साथ छेड़ छाड़ किया गया, manipulated biased report तैयार किए गए, टुसु गीतों में अतिक्रमण कर कुड़माली भाषा को खत्म किया जाने लगा और मानभूम को बंगाल में शामिल करने की पुरजोर कोशिश होने लगी कुड़माली भाषा और संस्कृति के लिए ये बहुत ही घातक साबित हो रहा था, कुड़माली और अन्य जनजातिय भाषाओं को जबरदस्ती बांग्ला में दिखाया जा रहा था इस षड्यंत्र के खिलाफ #देबेन्द्रनाथ_महतो (देबेन महतो ) लोगों को एकजुट करते है और अपना कुड़माली भाषा को भाषाई अतिक्रमण के खिलाफ खड़ा करते है क्यूंकि मानभूम के 70% लोगों की मातृभाषा कुड़माली थी (as per census report 1901) और ...

बृहद झारखंड के मूल आदिवासी कौन ?

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इतिहास और जमीनी हकीकत में अंतर क्यों है ?  छोटा नागपुर पठार यानी बृहद झारखंड। 1. बृहद झारखंड के मूल आदिवासी कौन ? 2. बृहद झारखंड में अनुवांशिक संरचना के आधार पर सबसे पुराने कौन ? 3. बृहद झारखंड में राढ़ मानव सभ्यता किसकी ?   4. बृहद झारखंड में कृषि सभ्यता के जनक कौन ?  5. बृहद झारखंड में सबसे अधिक जनसंख्या किसकी ?  6. बृहद झारखंड में सबसे अधिक गांव किसके ?  7. बृहद झारखंड में सबसे अधिक खेत भूमि किसकी ?  8. बृहद झारखंड में सबसे अधिक प्रचलित मूल भाषा किसकी ? 9. बृहद झारखंड में पर्व त्यौहार किसके ?  10. बृहद झारखंड की कला संस्कृति किसकी ?  इतिहास के पन्ने नहीं, भूमि में पदचिन्ह देखें ।

हजारीबाग नाम का झारखंड में एक बड़ा जिला हुआ करता था ।

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हजारीबाग नाम का झारखंड में एक बड़ा जिला हुआ करता था ।  जिसे तोड़ कर आज के तारीख में 6 नये जिलों बनाएं गए है ।  1961 के जनगणना अनुसार बृहद हजारीबाग जिले की जनसंख्या लगभग 24 लाख थी । जिसमें लगभग 21 लाख हिन्दुओं की जनसंख्या थी । मुस्लिम लगभग 3 लाख थी । बाकी अन्य लिखित धर्म को मानने वाले छोटी संख्या में थे । वहीं अन्य अलिखित धर्म को मानने वाले तथा धर्म से अनजान लोग लगभग 1500 ही थे ।   वहीं कुछ पन्नों बाद ही मातृभाषा के डाटा मे इस जिले के सब से बड़ी अनुसूचित जनजाति संथाल की मातृभाषा संथाली बोलने वालों की संख्या 1लाख 80हजार से ऊपर दिखाती है । अगर सभी अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या देखी तो लगभग 3 लाख हो जाएंगे । जिले की पुरी जनसंख्या 24 लाख में 3 लाख अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या जो मुस्लिमों के बराबर होती है , कम तो नहीं होती है । ये 3 लाख अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या कहां गई ।

छोटा नागपुर के आदिवासी कुडमि एक नस्ल है

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छोटा नागपुर के आदिवासी कुडमि एक नस्ल है धनबाद गजेटियर - 1963 पेज न. 108 छोटा नागपुर के आदिवासी कुडमि एक नस्ल है

KURMI MAHATO बिहार के KURMI से बिल्कुल अलग है।

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धनबाद गजेटियर में Coupland ने स्पष्ट लिखा की H H Risley और G A Grierson ने स्पष्ट कहा है की मानभूम धनबाद के KURMI MAHATO बिहार के KURMI से बिल्कुल अलग है।  बिहार वाले जाति नाम में जहां " soft - R " का प्रयोग करते हैं वहीं मानभूम धनबाद वाले " hard - R " का प्रयोग करते हैं जो " soft - D " पर पहुंचता है।  यानि छोटा नागपुर वाले - कुड़मि (KUDMI) बिहार वाले - कुर्मी / कुरमी (KURMI)  साथ में ये भी लिखते हैं  छोटा नागपुर वाले कुड़मि आदिवासी नियमों से संचालित होते हैं और ये एक नश्ल है धर्म नहीं ।

आदि कुड़मि युवा शक्ति

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आदि कुड़मि युवा शक्ति छोटा नागपुर पठार क्षेत्र मे एक कुड़मि जनजातिय संगठन है । जो कुड़मि जनजाति अपने देशज पहचान के लिए आजादी के बाद से संघर्ष कर रहा है , उनके संघर्ष को गति प्रदान करने का काम करती है।                   आदि कुड़मि युवा शक्ति  संगठन का मुख्य कार्य क्षेत्र - 1.कुड़मि इतिहास भाषा संस्कृति का प्रचार प्रसार।  2. भटके कुड़मि युवाओं को जीवन की सच्चाईयों से परिचय करवाना । 3. कुड़मि युवाओं के शिक्षा रोजगार और सफल सम्मानजनक जीवन के लिए प्रयास करना।  4. अपने जल जंगल जमीन की सुरक्षा के लिए प्रेरित करना।  5.युवाओं मे अपने देशज आदिवासियत पर गर्व करने को प्रेरित करना।

कुडमीयो का लिखित इतिहास क्यो नही है ?

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History of Kudmi History of kudmi

किस मिट्टी के बने हैं ये कुड़मि ।

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किस मिट्टी के बने हैं ये कुड़मि ।                 KUDMI BANDHU TOTEMIC 👉पार्टियों ने कुड़मि को टिकट नहीं दिया। कोई परेशानी नहीं। पार्टी हमारी माई बाप।  👉इस चुनाव मे कुड़मियों ने कुड़मि को वोट नहीं दिया। कुड़मियों का जवाब नहीं । छुआछूत की बीमारी से ग्रसित । 👉कुड़मियों के ST आंदोलन, जागरूकता आंदोलन का कोई असर नही पड़ा। अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य की कोई चिंता नहीं । 👉राष्ट्र बनाने निकले हैं ये कुड़मि। घर मे 3 टाईम खाने का जुगाड़ नहीं।  👉अपने देवा भूता को पेड़ के नीचे छोड़ , मंदिर बनाने निकले हैं । 👉अपने बाप दादा की बनाई खेतवाड़ी संभल नहीं रही , CNT हटाने वालों का जयकारा लगा रहे हैं । 👉पढ़ लिख कर अपना इतिहास पता ही नहीं, रामायण महाभारत पुराना वेद का अनुवाद लिखने को आतुर , लाख रुपया , लेखक का तमगा और राष्ट्रीय पुरस्कार का ऑफर ।