Black Day for Manbhum

⚫️Black Day for Manbhum ⚫️


1948 में मानभूम डिस्ट्रिक्ट कमिटी कांग्रेस पार्टी द्वारा बांग्ला भाषा को मानभूम का भाषा बनाने का प्रस्ताव लाती है, प्रस्ताव 43/54 वोट से ख़ारिज होजाता है, मात्र 11 लोगों ने सहमति जताई थी 55 में

कमिटी के प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी ने इसके बाद इस्तीफा देकर अतुल चंद्र घोष के नेतृत्व में लोक सेवक संघ बनाया और बांग्ला भाषा को आधिकारिक भाषा बनाने में लग गए, इसके लिए census रिपोर्ट के डाटा के साथ छेड़ छाड़ किया गया, manipulated biased report तैयार किए गए, टुसु गीतों में अतिक्रमण कर कुड़माली भाषा को खत्म किया जाने लगा और मानभूम को बंगाल में शामिल करने की पुरजोर कोशिश होने लगी

कुड़माली भाषा और संस्कृति के लिए ये बहुत ही घातक साबित हो रहा था, कुड़माली और अन्य जनजातिय भाषाओं को जबरदस्ती बांग्ला में दिखाया जा रहा था

इस षड्यंत्र के खिलाफ #देबेन्द्रनाथ_महतो (देबेन महतो ) लोगों को एकजुट करते है और अपना कुड़माली भाषा को भाषाई अतिक्रमण के खिलाफ खड़ा करते है क्यूंकि मानभूम के 70% लोगों की मातृभाषा कुड़माली थी (as per census report 1901) और मानभूम को झारखंड राज्य में ही रखा जाए, इसके लिए आंदोलन करते है
बिहार विधानसभा में देबेन बाबु ने ऐतिहासिक भाषण देते हुए स्पष्ट किया था कैसे कुड़माली भाषा और मानभूम के संस्कृति का बांग्ला भाषा संस्कृति से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं
परंतु चतुर षड़यंत्रकारीयों ने सरकारी सहयोग से हर मुमकिन कोशिश की, और अंततः वे 60% मानभूम को 
धनबाद subdivision और वर्तमान पूर्वी सिंहभूम के कुछ थानो को काटकर पुरुलिया के रूप नया जिला बनाकर बंगाल में शामिल करवा लिया, भाषाई अतिक्रमण का ये विक्राल रूप का दुष्प्रभाव आज भी देखने को मिलता है झारखंड के क्षेत्रों में, कुड़माली जैसी कई भाषाओं को निगल लिया इसने

देबेन बाबु को शत शत नमन, उनका संघर्ष हमारे लिए प्रेरणाश्रोत है,आज की युवा पीढ़ी पुनः अपनी भाषा संस्कृति को जिंदा करेगी पुर्नस्थापित करेगी और ये भाषाई अतिक्रमण से खींची गई लकीर को मिटायेगी

जोहार 🙏
कुड़माली माञभाखि 💛

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