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भारतीय इतिसास मे एक" काला दिन

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चानकु महतो भारतीय इतिसास मे एक" काला दिन -------- 15 मई 1856 का दिन भारतीय इतिसास मे एक" काला दिन" के रूप मे दर्ज होनी चाहिए थी।पर नही हो सकी ।बल्कि यु कहिए नही की गयी ।ऐसा संयोगवस नही हुआ ,वल्कि ऐसा जानबुझकर एक साजिश के तहत दर्ज नही की गई।इसी दिन संथाल विद्रोह के अमर शहिद #चानकु महतो को अंग्रेज सरकार ने फाँसी के फंदे पर लटका दिया था ।  सवाल होता है  ,संथाल विद्रोह के महानायक,चानकु महतो के शाहदात और कारनामो का उल्लेख सरकारी रेकार्ड मे तो दर्ज है ,पर भारत के नमकहराम स्वनामधन्य इतिहासकारो ने भारत माता के इस बीर सपुत का नाम का उल्लेख  इतिहास की  किताबो मे करना जरूरी नही समझा ।आखिर क्यो?क्या ऐसा सिर्फ इसलिए  किया गया क्योकि अमर वलिदानी#चानकु महतो का जन्म एक साधारण गरीब कुडमी कृषक परिवार मे झारखंड की मीट्टी मे हुई थी ।अगर यही# चानकु महतो किसी तथाकथित उँच्च जाति के किसी परिवार मे पैदा हुआ होता और ऐसे कारनामे की होती तो चानकु महतो आज राष्ट्रीय हीरो होता ।हर चौक चौराहे पर उनकी मुर्तियाँ लगी होती ।इतिहास की किताबे उनके कारनामो के यशोगान से भरी पड़ी होती।क्या भारत...