कुड़मी समाज मे तलाक ( छाड़बेड़ ) :-
कुड़मी समाज मे तलाक ( छाड़बेड़ ) :-
स्त्री की और से तलाक (छाड़बेड़):-
स्त्री को अगर उसके पुरुष से नहीं बनती हैं। दोनों के बीच अनबन की अति हों जाने पर स्त्री और पुरुष दोनों के ससुराल वालों को बुलाकर ग्रामसभा के सामने स्त्री महुआ के पत्ते चिरती है।
इस तरह से छाड़बेड़(तलाक)की सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जाती थी।
लड़की महुआ के पेड़ को साक्षी मानकर बिहा करती हैं।
पुरुष की और से तलाक ( छाड़बेड़):-
पुरुष और स्त्री के बीच अनबन की अति हों जाने पर स्त्री और पुरुष दोनों के ससुराल वालों को बुलाकर ग्रामसभा के सामने पुरुष आम के पत्ते चिरता है।
इस तरह से तलाक की सामाजिक स्वीकृति प्रदान की जाती थी।
लड़का आम के पेड़ को साक्षी मानकर बिहा करता है।
हरिपद काड़ुआर
स्रोत:- जनजाति परिचिति (तुलनात्मक अध्ययन) *लक्ष्मीकांत मुतरुआर*
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