हम गरीब किसान
हम गरीब किसान
हम गरीब किसान हैं साहब हमारी पेट पर लात न मारो ,
तोल-भाव में कटौती करके हमारी रोजी तुम न मारो !
हम अन्नदाता कहलाते हैं आपके , आत्महत्या करने पर विवश न करो,
मेहनत और ईमानदारी हमारी पूंजी है ,अब और अग्नि परीक्षा न लो !
हम हालात से गरीब हैं बेशक पर आज तक बैईमानी नहीं सीखी
सबको पोस्टिक आहार खिलाकर, हम खुद खाते फीकी-फीकी !
मेहनत मजदूरी करके कमाने में घिस जाते हैं कपड़े-जुते सारे,
फिर भी दया नहीं आती आपको करते हो अनाजों के मौल-भाव हमारे !
अन्न उगाकर हर मौसम में मुहैया कराते बजार में , लाखों कोशिश करने पर भी नहीं मिलती मजदूरी हमारे !
पूर्वज-पुरखों से सीखा है हमने मेहनत करके खाना,
चोरी-चकारी, धोखा-धड़ी हमने नहीं सीखा-जाना !
फिर भी मिल नहीं पाता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा का आधार,
मोदी जी कहते आयेंगे "अच्छे दिन" कब तक करें इंतजार ??
: उत्तम कुमार केसरिआर
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