हमारा शारिरिक स्वास्थ्य

Dr Rajesh Mahto 

हमारा शारिरिक स्वास्थ्य  इस बात पर निर्भर करता है कि हम खाते क्या है ।ठीक इसी प्रकार हमारा मानसिक सोच ,प्रखरता ,दूरदर्शिता और  उर्वरता  इस बात पर निर्भर करता है कि हम पढते क्या है ।अर्थात हमारा मानसिक भोजन कैसा है ?हम रोज सुबह उठकर जितने अखबार पढते है, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे समाचार सुनते है या फिर किताबे पढते है ।उनमे से एक भी हमारे लोगो द्वारा लिखित या सृजित नही होती है ।लगभग सभी बाहरी या गैरझारखंडी व्यक्ति द्वारा लिखित या सृजित होती है जो निष्पक्ष नही है ।उसे किसी खास मकसद के लिए लिखा गया होता है ।ऐसे  अखबार, समाचार या पुस्तक हमारे लिए जूठन के समान है और जूठन खाकर जिन्दा रहनेवाला व्यक्ति मे आत्मा स्वाभिमान नही हो सकता है ।वो सीधा तन कर नही चल सकता है ।यही हम झारखंडियो के साथ हो रहा है ।हमारा भाषा हमारी संस्कृति हमारा इतिहास सब कुछ हमसे छुपाया जा रहा है और  एक कपोल कल्पित संस्कृति  से हमे रंगा जा रहा है, एक काल्पनिक  इतिहास हमे पढाया जा रहा है ।कहा जाता है किसी की भाषा छीन लो वो तुम्हारी गुलामी करने के लिए तैयार रहेगा ।किसी का इतिहास छिन लो वो विद्रोह नही कर सकेगा,  अन्याय का प्रतिकार नही कर सकेगा ।हमारे साथ भी ऐसा ही हो रहा है ।झारखंड के बुद्धिजीवियो कलम  उठाइए और नोच डालिए तथाकथित हमारे भला चाहने वाले बाहरी पंडितो का मुखौटा ।ताकि सत्य नजर आए ।धन्यवाद ।जोहार ।

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