कोयलांचल का एक सपूत शहीद कृष्णा महतो पूरे इलाके में मास्टर जी के नाम से प्रसिद्ध

रूपलाल महतो पिपरवार(देश प्राण संवाददाता):
कोयलांचल का एक सपूत शहीद कृष्णा महतो पूरे इलाके में मास्टर जी के नाम से प्रसिद्ध बिलारी के एक साधारण किसान परिवार में जन्म ०2-०5-1961 हुआ था उनके पिता का नाम गुलाब महत्तोऔर माता का नाम इंजरी देवी की पहली संतान थे ।पूरे इलाके में अशिक्षा का माहौल था शिक्षण संस्थान आज की तरह नहीं थे बचपन से ही परिश्रमी स्नेहसील वह मिलनसार प्रवृत्ति के कृष्णा महतो को गांव वाले प्यार से गालु कहा करते थे प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद टंडवा हाई स्कूल में अध्ययन किया ग्रामीण परिवेश में कम उम्र में शादी विवाह के तत्कालीन रिवाज से स्कूली शिक्षा के दौरान ही जानेमाने समाज सेवी व अमीन बाबू गणेश महतो के बडे भाई चुरामन महतो के बेटी नगिया देवी ( ग्राम पोकला पोस्ट कसियाडीह थाना टंडवा जिला चतरा )में दांपत्य सूत्र में बांध दिए गए ।शिक्षा के प्रति बेहद लगाव था मैट्रिक पास कर रांची कॉलेज से स्नातक बने वह रांची विश्वविद्यालय से एम कॉम बोकारो से B.Ed तथा कोलकाता यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा इन सर्वे का कोर्स पूरा किया ।कॉलेज जीवन में सामाजिक कार्यों के प्रति रुझान था उन्हें कॉलेज के अनुशासन के खिलाफ अभियान छेड़ा छात्रों के बीच लोकप्रिय हुए कॉलेज से जब वे घर आए घरेलू काम में हाथ जरूर बताते खेतों में हल चलाने में भी उन्हें संकोच नहीं करते थे बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते वहीं स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया करते जो बच्चे स्कूल नहीं जाते जाना चाहते उसके अभिभावक से मिलकर उन्हें प्रेरित करने का काम करते उनके पिता गुलाब महतो सीसीएल कर्मी थे वे चाहते थे कि उनकी जगह बड़े बेटे कृष्णा महतो को नौकरी दे दे लेकिन उन्हें नौकरी आस नहीं आया यहां तक की नौकरी के लिए कई जगहों से आए प्रस्ताव को ठुकरा दिया ।पढ़ाई पूरी कर जब घर लौटे तो ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की दूर व्यवस्था देख व शैक्षणिक वातावरण मैं उन्हें इस दिशा में कुछ सोचने को मजबूर किया।वे आसपास के प्रबुद्ध लोगों को संगठित कर कल्याणपुर आदिवासी  उच्च विद्यालय की नींव् रखी। वे उच्च विद्यालय के पहले प्राध्यापक नियुक्त किए गए। आज भी यह विद्यालय सुदूर वर्ती ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान साबित हुआ है ।बिना किसी प्रकार का शिक्षण शुल्क के लिए सेवा भावना से जीवन प्रयत्न शिक्षा दान करते रहे। 1980 _84 में आय शिबू सोरेन गुरु जी ने इनकी प्रतिभा वह गतिविधियों को देख कर झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्यता दी ।बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य बनाए गए ।   पिपरवार क्षेत्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा व झारखंड आंदोलन के  सूत्रपात् में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन दिनों बाँदे  उराव बैजनाथ साव बालकृष्ण महतो इनके लिए निकट सहयोगी हुआ करते थे ।तब तक गुरु जी का यह शिष्य कृष्णा महतो मास्टर जी की उपाधि पा चुके थे ।1988 -89 में पवार क्षेत्र में खदान खुलने लगी ।कोयला खदानों के खुलने से काफी संख्या में इलाके के लोग विस्थापित हुए सीसीएल द्वारा अधिग्रहित जमीन के बदले नौकरी व उचित मुआवजा दिलाने के लिए कई बार आंदोलन किया झारखंड मुक्ति मोर्चा आंदोलन में कई बार जेल यात्राएं की विस्थापितों की समस्या के निदान के लिए गठित विस्थापित मोर्चा के पांचवें अध्यक्ष बनाए गए प्रबंधन के साथ विस्थापितों की समस्या हो या आंदोलन से निपटने की अपनी भूमिका से प्रबंधन में अपनी गहरी पैठ बना कर विस्थापितों के लिए संघर्ष करते रहे जीतना मान-सम्मान ग्रामीणों द्वारा दिया जाता या अधिकारी वर्ग में भी उनके प्रति वहीं आदर सम्मान का भाव हुआ करता था अंत में वह शुभ घड़ी 25 नवंबर 1999 में आई जब वह कल्याणपुर हाई स्कूल से छुट्टी के बाद सप्ताहिक हाथ में निकले उसी समय सरेराह सरेआम भाकप माओवादी नक्सलियों ने  गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी। कुछ ही वर्ष में इनके सदमे में माँ -पिताजी व पत्नी भी स्वर्ग सिधार गए। टुवर  एकलौता पुत्र अनुप कुमार सुदर्शन पढाई अवधी मे ही सीसीएल नौकरी प्राप्त कर जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

Comments

Popular posts from this blog

बारह (12) मासे तेरह (13) परब

कुड़मि एक जनजाति

Kudumi Movement