महामाञ और बुडहाबाबा के संबंध मे प्रश्न पुछा गया है ।
महामाञ और बुडहाबाबा के संबंध मे प्रश्न पुछा गया है ।
ये सही बात है कि सारना धर्म मे भगवान के अस्तित्व पर बिश्वास नही किया जाता है और हमलोग किसी काल्पनिक देवी देवताओं या शक्ति पर बिश्वास नही करते हैं ।जो है या जो कभी था उसी पर बिश्वास किया जाता है, इसी लिए इस धर्म को सत्य धर्म या सारी धर्म भी कहा जाता है ।हम भूत
यानी पास्ट को याद करते हैं श्रद्धा करते हैं अराधना करते हैं ।जिस प्रकार हिन्दु धर्म वाले अपने आप को मनु की संतान मानते हैं जिस कारण वे मनुष्य कहलाते है ।इस्लाम के अनुयायी अपने आप को आदम के संतान मानते हैं जिस कारण आदमी कहे डाते है ठीक उसी तरह सारना धर्मावलंबी अपने आप को हड (प्रथम पुरूष यानि बुडहाबाबा )की संतान मानते हैं जिस कारण वे हड कहलाने है ।हड शब्द मनुष्य तथा आदमी का प्रयायवाची है ।हड मतलब मानव ।कुडमालीमें हड शब्द से काफी शब्द निकले हैं जैसे फुहड सुहड बेहड ठेहड आदि जिसका अर्थ क्रमशः गंदा आदमी, अच्छा आदमी, बिना मनुष्य वाली जगह यानी निर्जन तथा हड का ठहरने की जगह यानी घर है ।हड,प्रथम पुरूष को स्वयं उतपन्न होने के कारण स्वंभु या" शंभु" भी कहा जाता है वे वायु से उतपन्न बताये जाते हैं जिस कारण उन्हें व्योम या "बम "भी कहा जाता है ।वे हमारे प्रथम पूर्वज है जिसका नाम हड था (आजकल हर हर जो हड हड से ही बना है) वे प्रथम पुरूष थे ।चुकि हमारे संस्कृतिक मान्यता मे अपने से बडो का नाम नही पकडा जाता है उनहे रिस्ते के नाम से पुकारा जाता है ।आजा (पिताजी के पिता) से सभी बडे को बुडहाबाबा ही कहा जाता है, इसलिए हड या प्रथम पुरूष यानि हम अपने पहले आजा का नाम नही पकड कर रिस्ते के नाम से ही" बुडहाबाबा "कहते हैं ।बाद में उनको और कयी नाम दिया गया ।हमारे आगन में जो भुत पीडहा है वे बुडहाबाबा के ही थान या समाधी के प्रतिक है ।बुडहाबाबा हमारे अगुआ थे हमारे पुर्वज थे हमारे पथप्रदर्शक थे इसलिए उनहे इस्वर ( इस- अगुआ जैसे हल के आगे आगे चलने वाल को इस कहा जाता हैतथा हड, यानि इस +हड= इसहड बना जो बाद में अपभ्रसित होकर इश्वर बना) । अब आते हैं महामाञ ।महामाञ इस धर या पृथ्वी को कहा जाता है जो सभी" माञेकरो माञ "माओ की भी मा है इसलिए महामाञ कहलाती है ।क्योकि पैदा होने से मृत्यु तक बही हमे पालती है खिलाती पिलाती है हमे दुलारती है इसी कारण महामाञ कहलाती है ।देवताओं ने बुडहाबाबा की काफी तिरस्कार की थी परन्तु अंततः उन्हें हारना पडा झुकना पडा और सभी देवताओं का देवता स्वीकार कर महादेव की उपाधि दी थी ।देवता बुडहाबाबा से काफी त्रस्त रहते थे इसलिए साजिश के तहत उनहे तथाकथित समुद्र मंथन से प्राप्त जहर जबरदस्ती खिलाकर मार डाला गया था ।पर बिद्रोह के भय से उनके मृत्यु के खबर को छुपा कर रखा गया ।भोगता परब या भक्ता खुटा बुडहाबाबा की ही श्राद्ध है ।चैत पर्व त्योहार नही दुख का अवशर है ।हम बुडहाबाबा के मृत्यु शोक मनाते हैं ।भगता पर्व के विधि विधान को गौर किजिएगा आपको सब समझ में आ जाएगी ।पाट भक्ता माथे मे लेकर जिस लकडी को लेकर चलते हैं वो मृत बुडहाबाबा की ही प्रतिक है ।चैत पर्व का थीम काफी कुछ मुहर्रम से मिलता जुलता है ।हमलोग खुद को तकलीफ देते हैं धिक्कारते है कि हमारे रहते हम आपको नही बचा पाए ऐसे शरीर और जिवन को धिक्कार है ।बैसे सारना धर्मा के उपर जल्द ही चारियान महतो, फुसडाबाद,पुरलिया की एक किताब प्रकाशित हो रही है जिसमे काफी विस्तृत जानकारी दी गई है ।
जोहार ।
By Dr. Rakesh Mahato
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