साधुचरण महतो ने 5 बिन्दुओ को कहकर सरकार को सड़क पर घसीटा है:-

साधुचरण  महतो ने 5 बिन्दुओ को कहकर सरकार को सड़क पर घसीटा है:-

1)मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री परंपरा पर चोट करेंगे तो होगा विरोध
2) कोई व्यक्ति बिहार , झारखण्ड , युपी सभी जगह अधिकार ले यह नहीं चलेगा
3)रघुवर के टूटने सम्बन्धी बयान पर पलटवार करते हुए कहा -  रघुवर टूटेंगे तो बीजेपी में और लोग है
4) मुख्यमंत्री आज है कल नहीं भी रह सकते है
5)संगठनऔर सरकार अलग-अलग चीजे हैसंगठनपार्टी के लोग चलते है , विधायक सरकार चलाते है
पर जनता को तो अंतिम तक लड़ाई लड़नी है , जब तक खतियान आधारित स्थानीय नीति लागु नहीं हो जाती
यह सरकार और जनता के बीच का संघर्ष है , चिंगारी आग का रूप ले रही है
हम मूलवासियो और  आदिवासियों को सरकार ने आग में झौका है अब इस आज मैं जनता सरकार और बाहरी को झौकेगी
जय झारखण्ड
[11/05 3:52 pm] ‪+91 95070 26703‬: Ranchi LIVE
सबसे बड़ी खबर : कौन थे हेमंत के दूत, और उनसे क्यों मिले भाजपा के 28 विधायक :

झारखंड में भाजपा और सरकार के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। स्थानीय नीति की आग सुलग रही है। मौजूदा हालात में सत्ता और संगठन स्तर पर आग बुझाने की कोशिश नहीं हुई, तो बगावत की स्थिति बन सकती है। भाजपा के कई विधायक कुछ दिन पहले इस मुद्दे पर बोकारो में पूर्व मुख्यमंत्री सह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के दूत से मिले। हेमंत के दूत भी विधायक हैं।

बोकारो में बगावत :

कोल्हान में पदस्थापित एक एसपी के परिवार में वैवाहिक समारोह में शामिल होने भाजपा के विधायक बोकारो में इकट्ठा हुए थे। वे चाहते थे कि हेमंत सोरेन से सीधी बातचीत हो। लेकिन, हेमंत ने अपने दूत को भेजा। विधायकों ने दावा किया कि सही तरीके से प्रयास आगे बढ़ा तो पार्टी के दो तिहाई एमएलए अलग होकर नई सरकार का गठन करा देंगे। झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्या ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने सोमवार काे बताया कि भाजपा के कई विधायक बोकारो में मिले थे। विधायक चाहे किसी दल से जुड़े हों, स्थानीय नीति पर उनके मन में पीड़ा है। सत्ता परिवर्तन के बारे में कुछ कह नहीं सकते, लेकिन राजनीति में सरकार बनाने की संभावना से कभी इनकार नहीं किया जा सकता।

चिंगारी लग चुकी है, अगर आग भड़क गई तो संभालना मुश्किल होगा : साधुचरण महतो

ईचागढ़ के भाजपा विधायक साधुचरण महतो ने खुलकर कहा कि स्थानीय नीति के मुद्दे पर चिंगारी लग चुकी है। मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय से अनुरोध किया गया है कि इसे आग बनने से रोकें। आग भड़क गई तो संभालना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान नीति मूलवासी और सदान को स्वीकार नहीं है। संशोधन नहीं हुआ तो वे भाजपा से दूर चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के 28 विधायक अपने स्टैंड पर कायम है। स्थानीय नीति के घोषित होने के पहले सामूहिक हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था। उसमें सुझाव दिया गया था कि किसी भी जिले के अंतिम भू-बंदोबस्त सर्वे को आधार बनाया जाना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्र के विधायकों को वोट बैंक प्रभावित होने का डर

रघुवर सरकार की स्थानीय नीति भाजपा के वैसे विधायकों को नहीं पच रही है, जिनके निर्वाचन क्षेत्र में ग्रामीण इलाका अधिक हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में वोट बैंक प्रभावित होने का डर भी इन्हें सता रहा है। 28 विधायकों ने पहले ही मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर विचार करने का सुझाव दिया था। सुझाव नहीं माने जाने से ये नाराज हैं। सीएम के कामकाज के तौर-तरीके और बोलने के लहजे से भी कुछ विधायक नाखुश हैं।

अर्जन मुंडा पहले ही जता चुके हैं विरोध

सरकार पर अब तक चुप रहे अर्जुन मुंडा भी विरोध में आ चुके हैं। दो दिन पहले उन्होंने जमशेदपुर में स्थानीय नीति पर विचार करने का सुझाव देते हुए चेतावनी भी दी थी।

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