झारखंडी कुडमी संगठन हर जगह पर कुडमी /कुर्मी लिख रहे है
कुछ झारखंडी कुडमी संगठन हर जगह पर कुडमी /कुर्मी लिख रहे है
।और कुडमी /कुर्मी को आदिवासी घोषित करने की मांग कर
रहे है ।इनमे से कुछ संगठन के कार्यक्रम मे बिहारी कुर्मी भी बढचढ
कर हिस्सेदारी निभा रहे है ।सवाल होता है कि इसका आधार
क्या है? 1881 मे प्रकाशित सर एच एच रिजले की प्रकाशित
"कास्ट एन्ड ट्राइबस अफ बंगाल" मे साफ कर दिया गया है कि
कुर्मी तथा कुडमी दो अलग अलग जाती है ।झारखंड के कुडमी
तथा उतर बिहार के कुर्मी दोनो अलग अलग प्रजाति के लोगहै ।
झारखंड के कुडमी आदिवासी है जबकि बिहार के कुर्मी
आरजीकल रेस के लोग है ।उल्लेखनीय है कि रिजले साहेब की
रिपोर्ट के आधार पर ही 1913 मे पहली बार 13 जाती को
प्रीमीटिब ट्राइब के रुप मे मान्यता दी थी जिसमे झारखंड के
कुडमी भी शामिल थे । पुनः 1981 मे एनथरोपोलोजीकल सर्वे
आफ इंडिया ने पुरे भारत के सभी जातियो की एक मानवमिती
सर्वे रिपोर्ट "द पिपुल अफ इनडीया "नाम से प्रकाशित की है ।
यह रिपोर्ट 60 से अधिक खंड मे प्रकाशित हुई है ।इसके बिहार
खंड "पीपुल्स आफ बिहार "मे कुडमी तथा कुर्मी दोनो की ही
अलग अलग रिपोर्ट छपी है ।कुडमी को जहा जनजाति बताया
गया है वही कुर्मी को आर्य रेस का उच्च वर्निय प्रजाति
बताया गया है ।कुछ समय पूर्व केन्द्र सरकार की "मिनिस्ट्री
ऑफ ट्राइबल अफेयर्स "ने इसी मुद्दे पर वार्ता के लिए झारखंड से
कुडमी प्रतिनिधि मंडल को दिल्ली बुलाया था ।उस
प्रतिनिधि मंडल मे मै भी शामिल था ।वार्ता मैं सबसे पहले
मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स के चीफ सेक्रेटरी ने पूछा कि
आप लोग कुडमी है या कुर्मी है? उन्होंने आगे कहा कि हम जानते
है कि कुडमी आदिवासी है जबकि कुर्मी आरजीकल रेस के लोग
है और झारखंड के कुडमी के साथ मिलकर आदिवासी बनने के
फिराक मे है । आपलोग का मामला इसी घालमेल मे उलझा हुआ
है ।पर कुछ झारखंडी अभी भी अपने जिद मे अडे हुए है और कुडमी /
कुर्मी लिख रहे है । अब आपलोग बताइए झारखंड के कुडमीयो के
असली दुश्मन कोन है? ऐसे लोग बिहारी कुर्मी से मिलने वाली
पैसे के बदौलत अपनी राजनीति चुकाना चाह रहे है । अब
आपलोग ही विचार किजिए इनके साथ क्या किया जाना
चाहिए?
धन्यवाद ।जोहार ।
-राकेश महतो
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