एक डाँक्टर के नजर में झारखंड की CNT/SPT act और हमारा ST Status.
दो घाव एक ही शरीर में उभरा है और साथ-साथ दर्दनाक एवं जानलेवा बनता जा रहा है !
पहला घाव सर पर है जो भयानक एवं गहरा है ,
दूसरा घाव पैर पर है जो वो भी नासूर बनते जा रहा है !
डाँक्टरों का कहना है कि अविलंब surgical operation करना होगा तभी मरीज की जान बच सकती है !
अब देखा जा रहा है कि ये तो बड़े महंगे operations हैं, परिजनों के आपसी मनमुटाव और गरीबी के कारण मरीज अभी भी सरकारी खैराती अस्पताल में पड़ा हुआ है। अब मरीज की जान बचाना भी जरूरी है,
बुद्धिजीवियों, सलाहकारों का मानना है कि सर ज्यादा महत्वपूर्ण भाग है शरीर का, पहले इसी का operation करवाना/करना होगा !
पैर को तो हम बाद में भी देख ही सकते हैं !
डाँक्टर कहते हैं अगर पैर पे अभी ध्यान नहीं दिये तो पैर को काटना पड़ सकता है !
फिर हमेशा (लाचार-बेवश) Wheel Chair का सहारे जिन्दगी बिताना पड़ेगा !
हालात ये है कि वर्तमान में सर का operation ना हो पाया तो जान ही न बच पायेगी, तो उन पैरों का होकर भी क्या हासिल होगा ??
लम्बे समय से परिवार के एवं निजी लोगों द्वारा इस बात पर कोई ठोस निर्णय ना ले पाने के बजह से मरीज दिनोदिन कमजोर होते जा रहा है, खून की कमी... दुबलापन साफ झलक रहा है !
दोनो पहलुओं पर नजर रखते हुए अविलंब ठोस कदम उठाने की जरूरत है हमें कुछ ऐसा करना होगा जिससे मरीज की बिना जान एवं पैर गँवायें ठीक हो और बिल्कुल स्वस्थ भी हो उठे !!
एक डाँक्टर के नजर में झारखंड की CNT/SPT act और हमारा ST Status.
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