22 सितम्बर बसंत बाबु की पुण्यतिथि

22 सितम्बर बसंत  बाबु  की पुण्यतिथि
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  कुड़माली भाषा-साहित्य हित के लिए समर्पित रहे बसंत बाबू
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आर. पी. महतो

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झारखंड़ी कुड़मियों के अधिकार व हक के लिए बसंत कुमार वंशरियार का जीवन समर्पित रहा। बसंत बाबू ने अपना सारा जीवन कुड़माली भाषा व साहित्य से सम्बंधित पुस्तक, लेख, कविता आदि के लिए समर्पित कर दिया। बसंत बाबू 22 सितंबर 2011 को दुनिया छोड़कर चल बसे। अपनी अंतिम सांस तक वे कुड़मी जाति व कुड़माली भाषा हित के लिए समर्पित रहे। बसंत बाबू का जन्म तमाड़ के दिंदली गांव में 2 अप्रैल 1929 को एक कृषक परिवार में हुआ था। उनके माता का नाम परिबा महतो व पिता का नाम पम्बल महतो था। उनके रोम-रोम में समाज सेवा की भावना थी। वे परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए खेतीबारी के साथ पशुपालन के व्यवसाय से जुड़े और समाज के प्रति समर्पित रहे। समाज के प्रति उनकी भावना को देखते हुए उनके पंचायत के लोगों ने दबाव डालकर उन्हें मुखिया का चुनाव लड़ाया और वे मुखिया निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने वृहत्तर आदिवासी कुड़मी समाज की स्थापना की और अविभाजित बिहार, बंगाल व उड़ीसा को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उन्होंने कुड़मालिचारी, झारखंडी, जनजीवन, कुड़मियों की कहानी आदि कई पुस्तकें लिखकर कुड़मी समाज के मार्गदर्शन का कार्य किया। इसके अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में जनजाति समाज कुड़मी व कड़माली से संबंधित लेख लिखते रहे। समाज के प्रति सराहनीय योगदान के लिए झारखंड भाषा, साहित्य संस्कृति अखाड़ा द्वारा भी सम्मानित किए गए।

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