जितिआ (जितुवा)
💐 जितिआ💐 (जितुवा)💐
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कुड़मी एवं जनजातिय समुदाय में भादो महीना के शुक्ल पक्ष के तृतीया में"तिज"एकादशी में"करम"एकादशी के बाद अष्टमी में"जितिआ"(जितुवा)परब बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
"तिज" के सात दिन बाद "करम"परब।
करम परब के ग्यारह दिन बाद मनाया जाता है:-------
💐 जितिआ"💐
कुड़मी एवं जनजातिय समुदाय के बड़े बुजुर्ग पुर्वापुरूष इसी तरह से दिन,और तिथि का गणना कर परब आगमन का इंतजार के साथ तैयारी करते हैं।इसके लिए कोई पाँजी पूथी का जरूरत नहीं पड़ता है।
तीन ईख(आँकडाड़ी)ईकट्ठे जड़ सहित एक साथ बाँधकर आँगन में गाड़ा जाता है,उसके बाद विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना किया जाता है।
"तिज" पतिदेव के दीर्घायु,"करम"भाईयों के दीर्घायु,एवं"💐 जितिआ💐"पुत्रों के दीर्घायु के लिए महिलाएं व्रत एवं उपवास रहकर आर्शिवाद मांगते हैं।
इन तीनों परब में जन्म लेने वाले बच्चों का नामकरण भी इसी आधार पर की जाती है।
तिज में जन्म लेने पर -तिजन,तिजोपदो,।करम में जन्म लेने पर -करमु,करमी।एवं
💐 जितिआ💐 में जन्म लेने वाले बच्चों का नामकरण -जितु,जितवाहन जिपानी इत्यादि रखा जाता है।
कुड़मी एवं जनजातीय समुदाय में ठण्ढक किस प्रकार (तरह) क्रमशः धीरे धीरे बढ़ता है,उसका आकलन भी इसी परब-त्योहार के आधार (अनुसार)पर ही करते हैं:---जैसा कि तिज में एक टुपा,
करम में एक डाला,
छाता परब में एक छाता,
जितिआ में एक डेमनी,
दसाईं में दस भार तथा पूस (मकर)में फास फूस यानि ठण्ढा कम होना शुरू हो जाता है,या तो फिर कम हो जाता है।
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कुड़मी एवं जनजातिय समुदाय में भादो महीना के शुक्ल पक्ष के तृतीया में"तिज"एकादशी में"करम"एकादशी के बाद अष्टमी में"जितिआ"(जितुवा)परब बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
"तिज" के सात दिन बाद "करम"परब।
करम परब के ग्यारह दिन बाद मनाया जाता है:-------
💐 जितिआ"💐
कुड़मी एवं जनजातिय समुदाय के बड़े बुजुर्ग पुर्वापुरूष इसी तरह से दिन,और तिथि का गणना कर परब आगमन का इंतजार के साथ तैयारी करते हैं।इसके लिए कोई पाँजी पूथी का जरूरत नहीं पड़ता है।
तीन ईख(आँकडाड़ी)ईकट्ठे जड़ सहित एक साथ बाँधकर आँगन में गाड़ा जाता है,उसके बाद विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना किया जाता है।
"तिज" पतिदेव के दीर्घायु,"करम"भाईयों के दीर्घायु,एवं"💐 जितिआ💐"पुत्रों के दीर्घायु के लिए महिलाएं व्रत एवं उपवास रहकर आर्शिवाद मांगते हैं।
इन तीनों परब में जन्म लेने वाले बच्चों का नामकरण भी इसी आधार पर की जाती है।
तिज में जन्म लेने पर -तिजन,तिजोपदो,।करम में जन्म लेने पर -करमु,करमी।एवं
💐 जितिआ💐 में जन्म लेने वाले बच्चों का नामकरण -जितु,जितवाहन जिपानी इत्यादि रखा जाता है।
कुड़मी एवं जनजातीय समुदाय में ठण्ढक किस प्रकार (तरह) क्रमशः धीरे धीरे बढ़ता है,उसका आकलन भी इसी परब-त्योहार के आधार (अनुसार)पर ही करते हैं:---जैसा कि तिज में एक टुपा,
करम में एक डाला,
छाता परब में एक छाता,
जितिआ में एक डेमनी,
दसाईं में दस भार तथा पूस (मकर)में फास फूस यानि ठण्ढा कम होना शुरू हो जाता है,या तो फिर कम हो जाता है।
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